"मैं शहर हूँ मैं गांव से बहुत आगे निकल चुका हूँ , गांव को तो मैं हजार कदम पीछे छो "मैं शहर हूँ मैं गांव से बहुत आगे निकल चुका हूँ , गांव को तो मैं हजा...
छोड़ दो बुआई खुशी स्वचालित है। छोड़ दो बुआई खुशी स्वचालित है।
हमने सवेरे जी लिये और शामें ढलती छोड़ दीं फिर चराग़ों को बुझाके आँखे जलती छोड़ दीं हमने सवेरे जी लिये और शामें ढलती छोड़ दीं फिर चराग़ों को बुझाके आँखे जलती छोड...
और जब हम थक जाते हैं दुहरा -दुहराकर , फिर उसे ही पचासों बार हमसे लिखवाते हैं। और जब हम थक जाते हैं दुहरा -दुहराकर , फिर उसे ही पचासों बार हमसे लिखवाते हैं।
आंगन आपके ही जन्मी, मैंने भी दादी संग तुलसी को सींचा था, जब जब बीमार पड़े थे बाबा आंगन आपके ही जन्मी, मैंने भी दादी संग तुलसी को सींचा था, जब जब बीमार...
बैठा हूँ फिर भी लिये फूल हाथों में बेवफ़ा फागुन में जो दग़ा दे गयी। बैठा हूँ फिर भी लिये फूल हाथों में बेवफ़ा फागुन में जो दग़ा दे गयी।